Covid-19 Treatment: रेमडेसिविर कोई जादू नहीं...कोरोना और उसके इलाज पर क्या-क्या बोले एम्स डायरेक्टर रणदीप गुलेरिया


 एम्स के डायरेक्टर डॉक्टर रणदीप गुलेरिया
डॉक्टर गुलेरिया ने कहा, 'पिछले एक साल में हमने दो चीजें सीखी हैं जो महत्वपूर्ण है- दवाइयां और उन्हें देने की टाइमिंग। अगर दवा बहुत पहले या देर से दी गई तो यह नुकसान कर सकता है। पहले ही दिन कई दवाओं के कॉकटेल को देने से और ज्यादा नुकसान होगा। मरीज मर सकता है।' उन्होंने पहले ही दिन से स्टेरॉड्स देने के खिलाफ भी चेताया है।


रणदीप गुलेरिया ने कहा कि रेमडेसिविर कोई जादू की छड़ी नहीं है। उन्होंने कहा, 'यह समझना महत्वपूर्ण है कि रेमडेसिविर कोई जादू नहीं है और यह कोई ऐसी दवा नहीं है जो मौत को कम करती है। हम इसे इसलिए इस्तेमाल कर सकते हैं कि हमारे पास ऐंटी-वायरल ड्रग नहीं है। अगर यह बिना किसी लक्षण वाले व्यक्ति या हल्के लक्षण वाले मरीज को काफी पहले दे दी जाए तो कोई काम नहीं करेगी। अगर देरी से दी जाए तब भी यह किसी काम की नहीं है।' गुलेरिया ने कहा, 'रेमडेसिविर सिर्फ उन्हीं मरीजों को दी जानी चाहिए जो अस्पताल में भर्ती हैं, जिनका ऑक्सीजन लेवल एकदम निचले स्तर पर पहुंच गया है और जिनमें संक्रमण का पता चेस्ट एक्स-रे या सीटी स्कैन में मिले।'

एम्स डायरेक्टर ने कहा, 'पहले ही दिन अगर मरीज को स्टेरॉयड देते हैं तो यह किसी काम का नहीं है। वे सिर्फ तभी काम करते हैं जब मरीज की हालत मध्यम से गंभीर हो और ऑक्सीजन लेवल घट रहा हो।' उन्होंने आगे कहा, 'रिकवरी ट्रायल्स बताते हैं कि स्टेरॉयड से फायदा हो रहा है लेकिन यह भी जानना अहम है कि वे कब दिए गए। अगर उन्हें ऑक्सीजन लेवल के गिरने से काफी पहले दे दिया गया तो इसके असर नुकसान वाले होंगे। जिन कोरोना मरीजों को काफी पहले स्टेरॉयड दिए गए उनकी मौत की आशंका अन्य मरीजों के मुकाबले ज्यादा है।'

प्लाज्मा थेरपी पर उन्होंने कहा कि इसकी महज सीमित भूमिका है। गुलेरिया ने कहा, 'अध्ययन बताते हैं कि प्लाज्मा थेरपी की सीमित भूमिका है और यह बहुत काम की नहीं है। 2 प्रतिशत से भी कम मरीजों को टोसिलिजुमैब की जरूरत पड़ती है, जिसका इन दिनों काफी इस्तेमाल किया जा रहा है। माइल्ड सिम्प्टम या बिना लक्षण वाले मरीज सिर्फ सिम्प्टोमैटिक ट्रीटमेंट से ठीक हो जाएंगे।'

(एएनआई से इनपुट के साथ)

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