सचिन मैच की पहली गेंद क्यों नहीं खेलते थे?

हमारे बचपन की एक याद हमेशा हमारे दिमाग में छपि होती है।
और वो है तेंदुलकर और गांगुली भारत के मैच की ओपनिंग करे।
उस समय दोनों बल्लेबाज शानदार फॉर्म में थे। बाएं हाथ के गांगुली और दाएं हाथ के बल्लेबाज सचिन को कैसे रोका जाए यह प्रतिद्वंद्वी गेंदबाजों के लिए हमेशा एक सवाल रहा है। पहले पंद्रह ओवरों में उन्होंने कई अच्छे तेज गेंदबाजों को पानी पिलाया है। सचिन और गांगुली दुनिया में अब तक की सबसे अच्छी ओपनिंग जोड़ी है। अब तक 136 पारियों में उनकी जोड़ी द्वारा बनाए गए 6609 रनों और 21 शतकों के रिकॉर्ड को कोई नहीं तोड़ पाया है।
लेकिन गांगुली ने हमेशा गांगुली और सचिन के बीच पहली ही गेंद खेली। मुझे याद नहीं है कि सचिन ने कभी पहली स्ट्राइक ली हो।
हम सचिन से बहुत प्यार करते है। मुझे लगता था कि गांगुली, एक कप्तान होने के कारण, सचिन के साथ अन्याय करते हैं, और पहली गेंद को खुद खेलते हैं। ओवर की आखिरी गेंद पर भी एक रन लेते है और स्ट्राइक अपने पास ही रखते हैं। आप में से भी किसी ना किसी को यही लगता होगा , है ना? लेकिन बात वो नहीं थी।अंत तक दोनों अच्छे दोस्त रहे।
गांगुली ने बीच में एक इंटरव्यू में यह कहानी बताई है।
तेंदुलकर खुद कभी भी पहली गेंद नहीं खेलना चाहते थे। मुझे नहीं पता कि उसका अंधविश्वास इसके बारे में क्या था लेकिन सौरव के बार-बार अनुरोध के बावजूद, वह नहीं खेले।
सचिन कहते थे,
“भारत की पारी की पहली गेंद के दौरान दर्शकों के बीच बहुत शोर होता है और अगर मैं पहली गेंद खेलता हूँ, तो शोर और भी बढ़ जाते हैं। केवल एक गेंद का सवाल है आपके द्वारा रन लेने के बाद, वहांसे मै ही स्ट्राइक पर जाऊंगा। ”
गांगुली इस तर्क पर आगे कुछ नहीं कह सके। एक समय था जब गांगुली काफी मैच फ्लॉप जा रहे थे, तब यहा पाकिस्तान की श्रृंखला थी। वसीम अकरम शोएब अख्तर फॉर्म में थे। इसलिए गांगुली ने तेंदुलकर के हाथ पैर पकड़ने लगे और उनसे अनुरोध करने लगे की वह कम से कम इस बार पहली शुरुआत करें। सचिन अंत तक नहीं कह रहे थे।
अंत में गांगुली को यह विचार आया।
सचिन और गांगुली ने मैदान संभाला। दोनों टीमों के प्रशंसक अपनी अपनी टीमो का जोश बढा रहे थे आवाज इतनी की छत उड़ जाएगी। सचिन को कुछ समझने के पहले ही गांगुली नॉनस्ट्राइकर एंड पर जाकर खड़े हो गए। तेंदुलकर को कुछ समझ नहीं आया।
वहां वह विरोधी टीम के सामने गांगुली से कुछ नहीं कह सके। वह यह सोचते रहे कि अगर में वापस नॉन स्ट्राइक रेंट पर चला जाऊं तो गेंदबाज यह सोचेगा कि दुनिया का सबसे भारी बल्लेबाज उसका सामना करने से डरता है।
तेंदुलकर ने चुपचाप पहली गेंद खेली। दोनों ने अच्छा स्कोर किया। यह नहीं पता है कि मैच के बाद तेंदुलकर ने गांगुली को कितना धोया होगा लेकिन गांगुली ने अगले मैच से पहली गेंद खेलना शुरू किया।
यही बात जब सचिन और सहवाग सलामी के लिए आते थे तब हुई थी।
गांगुली के बाद सहवाग के साथ तेंदुलकर की साझेदारी अच्छी चलने लगी, लेकिन सचिन यहां भी ओपनिंग के लिए नहीं आते थे।
2003 विश्व कप का भारत-पाकिस्तान मैच। सहवाग को लेफ्ट आर्म फास्ट बॉलिंग करने में थोड़ी परेशानी होती थी।इस वजह से वह शुरू से ही तेंदुलकर के पीछे लगे थे।
“पाजी मुझे अकरम का सामना नहीं करना है। आप पारी की शुरुआत करें। ”
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तेंदुलकर ने अंत तक कुछ नहीं कहा। सहवाग पाकिस्तान की पारी के अंत तक उनसे अनुरोध कर रहे थे। जब दोनों मैदान पर आए, तो सचिन ने सहवाग के बजाय खुद से शुरुआत की और अख्तर अकरम के जीवन की सबसे बडी धुलाई करकर इतिहास रच दिया।
तेंदुलकर तब ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ फाइनल में पहली गेंद खेलने आए थे लेकिन इस बार इतिहास दोहराया नहीं जा सका।


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